0 1 min 2 hrs

 बौद्ध धर्म में भगवान बुद्ध का जन्मोत्सव बुद्ध पूर्णिमा के रूप में बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है. यह दिन न सिर्फ उनके जन्म का प्रतीक है, बल्कि ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण से भी जुड़ा माना जाता है. इसलिए बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए यह तिथि अत्यंत पवित्र मानी जाती है. इस दिन लोग भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलकर मोक्ष और शांति की कामना करते हैं.

हिंदू धर्म में इस दिन वैशाख पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है. इसलिए, इस दिन स्नान-दान करना भी शुभ माना जाता है. क्योंकि, यह पूर्णिमा हिंदू धर्म में भी बहुत ही खास मानी जाती है. इस शुभ दिन गौतम बुद्ध के साथ श्रीहरि और मां लक्ष्मी की पूजा-उपासना करना भी शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा  की क्या तिथि रहेगी और क्या स्नान-दान का मुहूर्त रहेगा.

द्रिक पंचांग के अनुसार, बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 30 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 1 मई को रात 10 बजकर 52 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रोदय का समय शाम 6 बजकर 52 मिनट पर होगा.

बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान-दान का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 4 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इस दौरान किया गया स्नान-दान शास्त्रों में बहुत ही शक्तिशाली बताया गया है और इसके बाद किया गया स्नान राक्षस स्नान कहलाता है. इसलिए, कोशिश करें कि इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान करें.

बुद्ध पूर्णिमा ऐसे करें पूजन
बुद्ध पूर्णिमा के दिन स्नान और दान का विशेष महत्व होता है. भगवान बुद्ध को खीर का भोग अर्पित किया जाता है. इसके बाद प्रसाद को लोगों में बांटना शुभ माना जाता है. ध्यान, शांति और सेवा भाव पर विशेष जोर दिया जाता है.

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व
मान्यता है कि इसी दिन भगवान बुद्ध को बोधि प्राप्त हुआ था, इसलिए इसे उनका 'आध्यात्मिक पुनर्जन्म' भी कहा जाता है. इस दिन स्नान, दान और ध्यान करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और पापों से मुक्ति मिलती है.

बुद्ध पूर्णिमा की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान बुद्ध का जन्म सिद्धार्थ के रूप में एक राजघराने में हुआ था. राजसी जीवन त्यागकर उन्होंने सत्य की खोज के लिए कठिन तपस्या की. वर्षों की साधना के बाद वैशाख पूर्णिमा के दिन उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे “बुद्ध” कहलाए.

क्या दान करना चाहिए?
इस दिन जरूरतमंदों को दान करने से कई गुना पुण्य प्राप्त होता है.
– चावल, दाल, आटा, नमक
– सब्जियां और भोजन सामग्री
– वस्त्र या जरूरत की चीजें

अगर संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान कर पूजा करने के बाद दान करना और भी फलदायी माना जाता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *