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नई दिल्ली
भारत के ग्लोबल ट्रेड में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. अमेरिका का दबदबा अब कमजोर पड़ता दिख रहा है, क्योंकि चीन ने 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर बनने की बाजी मार ली है. भारत और चीन के बीच कुल ट्रेड 151.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया है. दिलचस्प बात यह है कि जहां ट्रेड बढ़ा है, वहीं भारत का चीन के साथ ट्रेड डिफिसिट भी बढ़ गया है। 

अमेरिका दूसरे नंबर पर खिसका
पिछले चार सालों (2021-22 से 2024-25) तक अमेरिका इस लिस्ट में टॉप पर बना हुआ था, लेकिन अब चीन ने उसे पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, इस ट्रेड के साथ एक चिंताजनक बात भी सामने आई है. भारत का चीन के साथ ट्रेड डिफिसिट बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। 

क्या कहते हैं आंकड़े?

    चीन के साथ ट्रेड- पिछले वित्त वर्ष में भारत ने चीन को 19.47 अरब डॉलर का सामान बेचा (निर्यात किया), जबकि वहां से 131.63 अरब डॉलर का सामान खरीदा (आयात किया). इसके चलते ट्रेड डिफिसिट बढ़कर 112.6 अरब डॉलर हो गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। 

    अमेरिका के साथ ट्रेड- अमेरिका को होने वाले निर्यात में मामूली बढ़त हुई है, लेकिन वहां से आयात बढ़ने की वजह से भारत का ट्रेड सरप्लस (मुनाफा) 40.89 अरब डॉलर से घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया है। 

    दूसरे देशों का हाल– रिपोर्ट के अनुसार, भारत का ब्रिटेन, नीदरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों के साथ निर्यात घटा है. वहीं, यूएई, जर्मनी और इटली जैसे देशों के साथ ट्रेड में पॉजिटिव बढ़त देखी गई है. रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से होने वाले आयात में भी कमी आई है। 

भारत का ट्रेड डिफिसिट कम होकर 20.67 अरब डॉलर हुआ
भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डिफिसिट मार्च में कम होकर 20.67 अरब डॉलर हो गया है. वहीं, देश का निर्यात फरवरी के 36.61 अरब डॉलर से 6.3 फीसदी बढ़कर 38.92 अरब डॉलर हो गया है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि 2025-26 के लिए भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया है, जो 2024-25 के इसी अवधि के आंकड़े 825.26 अरब डॉलर की तुलना में 4.22 फीसदी की ग्रोथ दर्शाता है. इस दौरान भारत का आयात 5.98 फीसदी घटकर 59.9 अरब डॉलर रह गया, जिससे फिस्कल डेफिसिट में भी कमी आई है। 

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